Guru Pushya Amrit Yog  Date, Muhurat, Significance, Puja Vidhi and Wealth Remedies

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गुरुपुष्यामृत योग 2026: महत्व, शुभ मुहूर्त, खरीदारी, पूजा विधि और धन प्राप्ति के उपाय

गुरुपुष्यामृत योग क्या है?

हिंदू धर्म में गुरुपुष्यामृत योग को सबसे शुभ और सिद्धिदायक योगों में से एक माना जाता है। जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बनता है, तब गुरुपुष्यामृत योग का निर्माण होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस योग में किए गए कार्यों में सफलता, समृद्धि और स्थायित्व प्राप्त होता है।

"गुरु" ज्ञान, धन, विवाह, संतान और भाग्य के कारक ग्रह हैं, जबकि "पुष्य नक्षत्र" सभी नक्षत्रों का राजा माना जाता है। इन दोनों के मिलन से बनने वाला गुरुपुष्यामृत योग अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।

गुरुपुष्यामृत योग का धार्मिक महत्व

गुरुपुष्यामृत योग को देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त योग कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शुरू किए गए कार्य लंबे समय तक लाभ देते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

इस योग में:

  • नया व्यवसाय शुरू करना शुभ माना जाता है।
  • सोना-चांदी खरीदना लाभकारी होता है।
  • घर, वाहन या संपत्ति खरीद सकते हैं।
  • निवेश करने से भविष्य में अच्छे परिणाम मिलते हैं।
  • शिक्षा, विवाह और करियर से जुड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।
  • धार्मिक अनुष्ठान और गुरु पूजा का विशेष महत्व होता है।

गुरुपुष्यामृत योग में क्या खरीदना चाहिए?

1. सोना और चांदी

गुरुपुष्यामृत योग में सोना और चांदी खरीदना धन वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदे गए आभूषण और धातुएं परिवार में समृद्धि लाती हैं।

2. संपत्ति और भूमि

यदि आप घर, फ्लैट, प्लॉट या जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह योग बेहद शुभ माना जाता है।

3. वाहन

नई कार, बाइक या अन्य वाहन खरीदने के लिए भी यह दिन अच्छा माना जाता है।

4. व्यापारिक वस्तुएं

व्यवसाय से जुड़े उपकरण, मशीनरी, कंप्यूटर, फर्नीचर या नई दुकान का उद्घाटन भी किया जा सकता है।

5. धार्मिक वस्तुएं

  • श्री यंत्र
  • कुबेर यंत्र
  • लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा
  • पूजा सामग्री
  • रुद्राक्ष

इनकी खरीद विशेष शुभ फल प्रदान करती है।

गुरुपुष्यामृत योग में क्या नहीं करना चाहिए?

  • किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।
  • झूठ बोलने और विवाद से बचना चाहिए।
  • उधार लेने से बचना चाहिए।
  • नकारात्मक विचारों को मन में नहीं रखना चाहिए।
  • गुरुजनों और बुजुर्गों का अनादर नहीं करना चाहिए।

गुरुपुष्यामृत योग पूजा विधि

सुबह की तैयारी

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
  • स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर की सफाई करें।

भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा

  • भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें।
  • हल्दी, चने की दाल और पीले वस्त्र चढ़ाएं।
  • घी का दीपक जलाएं।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

गुरु मंत्र जाप

ॐ बृं बृहस्पतये नमः

इस मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।

धन प्राप्ति के विशेष उपाय

1. पीली वस्तुओं का दान

गुरुपुष्यामृत योग में:

  • चना दाल
  • हल्दी
  • पीले वस्त्र
  • केले

का दान करने से गुरु ग्रह मजबूत होते हैं।

2. केले के वृक्ष की पूजा

केले के वृक्ष में भगवान विष्णु का निवास माना जाता है। इस दिन उसकी पूजा करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।

3. श्री यंत्र स्थापना

घर या कार्यालय में श्री यंत्र स्थापित करने से धन और वैभव में वृद्धि होती है।

4. कुबेर पूजा

भगवान कुबेर की पूजा करने से धन संचय और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है।

विवाह और वैवाहिक जीवन के लिए गुरुपुष्यामृत योग

गुरुपुष्यामृत योग विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन:

  • विवाह संबंध की चर्चा करना शुभ माना जाता है।
  • रिश्ते तय किए जा सकते हैं।
  • सगाई की योजना बनाई जा सकती है।
  • वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि की कामना की जाती है।

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करियर और व्यवसाय के लिए लाभ

गुरुपुष्यामृत योग में:

  • नई नौकरी ज्वाइन करना
  • नया व्यापार शुरू करना
  • महत्वपूर्ण अनुबंध पर हस्ताक्षर करना
  • नई शाखा का उद्घाटन करना
  • निवेश शुरू करना

विशेष लाभदायक माना जाता है।

गुरुपुष्यामृत योग के ज्योतिषीय लाभ

  • गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त होती है।
  • भाग्य मजबूत होता है।
  • आर्थिक उन्नति के अवसर बढ़ते हैं।
  • शिक्षा और करियर में सफलता मिलती है।
  • विवाह में आने वाली बाधाएं कम होती हैं।
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

निष्कर्ष

गुरुपुष्यामृत योग हिंदू धर्म और ज्योतिष में अत्यंत शुभ और दुर्लभ योग माना जाता है। यह दिन धन, वैभव, ज्ञान, विवाह, व्यवसाय और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष फलदायी होता है। यदि आप कोई नया कार्य शुरू करने, निवेश करने या जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की योजना बना रहे हैं, तो गुरुपुष्यामृत योग का लाभ अवश्य उठाएं।