भाई दूज, जिसे भाऊबीज या यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है, एक विशेष पर्व है जो पूरे भारत में भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह के बंधन को मनाने के लिए मनाया जाता है। यह पर्व दिवाली के दो दिन बाद आता है और इसे भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का एक पवित्र अवसर माना जाता है।
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धनतेरस दीवाली के पाँच दिवसीय उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है और इसे पूरे भारत में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। "धनतेरस" शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— धन जिसका अर्थ है संपत्ति और तेरस जिसका अर्थ है हिंदू पंचांग के कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि।
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विजयदशमी, जिसे दशहरा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह 2024 में 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा। विजयदशमी अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है और धर्म (सत्य) की अधर्म (असत्य) पर विजय को दर्शाता है। "विजयदशमी" का अर्थ है "विजय प्राप्त करने वाला दसवां दिन", और यह अश्विन माह में शुक्ल पक्ष के दसवें दिन मनाया जाता है।
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नवरात्रि के दसवें दिन माँ दुर्गा की पूजा की जाती है, जो शक्ति, साहस, और विजय की प्रतीक मानी जाती हैं। इस दिन को दशहरा भी कहा जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
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नवरात्रि के नवें दिन माँ दुर्गा के नवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माँ सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों और ज्ञान की देवी मानी जाती हैं और भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं।
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नवरात्रि के आठवें दिन माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की पूजा की जाती है। माँ महागौरी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और सुंदर है, और वे शुद्धता, भक्ति और ज्ञान का प्रतीक मानी जाती हैं।
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नवरात्रि के सातवें दिन माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। माँ कालरात्रि का स्वरूप काल और अंधकार को समाप्त करने वाला होता है। वे सभी प्रकार की बुरी शक्तियों से रक्षा करने वाली देवी हैं।
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नवरात्रि के छठे दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। माँ कात्यायनी को ज्ञान, शक्ति और भक्ति की देवी माना जाता है। वे दुर्गम और संकटमोचन के रूप में जानी जाती हैं।
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नवरात्रि के पाँचवे दिन माँ दुर्गा के पाँचवे स्वरूप माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है। माँ स्कंदमाता को कुंद फूलों की देवी और भगवान कार्तिकेय की माता माना जाता है। वे ज्ञान, शक्ति और वैभव की प्रतीक हैं।
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नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप माँ कुशमांडा की पूजा की जाती है। माँ कुशमांडा सृष्टि की रचनाकार हैं और उन्हें स्वास्थ्य, सुख, और समृद्धि की देवी माना जाता है।
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नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माँ चंद्रघंटा का यह स्वरूप शांति, सादगी और शक्ति का प्रतीक है। इनकी आराधना से भक्तों को मानसिक शांति और आत्म-विश्वास प्राप्त होता है।
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नवरात्रि के दूसरे दिन माँ दुर्गा के दूसरे स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह रूप देवी की तपस्या और साधना का प्रतीक है, जो संयम, त्याग, और शक्ति का साक्षात् रूप मानी जाती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से भक्तों को जीवन में धैर्य और समर्पण की शक्ति प्राप्त होती है।
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